कवि परमजीत सिंह "कोविद" "कहलूरी"
*दोहे*
कारण है मधुमेह का, ज्यादातर मिष्ठान।
घातक मीठा-मित्र है, कड़वा मित्र सुजान।।
पेड़ लगाओ साथियो, देते छांँव अपार।
फूल हवा फल भी मिलें, जीवन का आधार।।
स्वच्छ रखो तुम भूमि को, धरती कहे पुकार।
धरती जीवन दायिनी, समझो यह सुविचार।।
सूर्य चमकता हर दिवस, फैले सकल प्रकाश।
महकाता संसार को, जैसे पुष्प पलाश।।
कर लो देह सुडोल तुम, खा पोष्टिक आहार।
पाना है सम्मान तो, सीखो शिष्टाचार।।
*परमजीत सिंह "कोविद"* *"कहलूरी"*
*बिलासपुर हिमाचल प्रदेश*
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